शमशेर बहादुर सिंह का जीवन परिचय, shamsher bahadur singh ka jivan parichay

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शमशेर बहादुर सिंह का जीवन परिचय, shamsher bahadur singh ka jivan parichay

शमशेर बहादुर सिंह
शमशेर बहादुर सिंह


कवि शमशेर बहादुर सिंह का जीवन परिचय (shamsher bahadur singh ka jivan parichay) शमशेर बहादुर
( shamsher bahadur singh ) का जन्म देहरादून में वर्ष 13 जनवरी 1911 में हुआ था इनके (shamsher bahadur singh ke baare mein) प्रारंभिक शिक्षा देहरादून में पूर्ण हुई उसके बाद उन्होंने इलाहाबाद के विश्वविद्यालय में m.a. किया और रूभपा पत्रिका में सहायक संपादक बने उसके पश्चात कहानी नई कहानी कम्यून माया नया पंत आदि अनेक पत्रिकाओं का संपादन में सहयोग किया उसके बाद दिल्ली के विश्वविद्यालय में यूजीसी की योजना के अंतर्गत उर्दू हिंदी कोश का संपादन पूर्ण किया और सन 1981 से 85 में विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन मैं प्रेमचंद सर्जन पीठ के अध्यक्ष शमशेर सिंह बने शमशेर बहादुर ने अपने जीवन का दूसरा सप्तक 1951 मैं किया

आधुनिक कविता में शमशेर का कर्तव्य दो विभिन्न दिशाओं में प्रचलित हैं जो अज्ञेय कविता का प्रचलन किया और उसका माध्यम वस्तु तथा रूपा का दोनों के बीच संतुलन स्थापित करने का उद्देश्य था शिल्प कौशल के प्रति शमशेर बहादुरसिंह का अतिरिक्त जागरूकता है इस कारण से शमशेर और अज्ञेय द्वारा दो कविताओं का प्रकाशन किया जो एजरा पाउंड और इलियट के निकटतम हैं शमशेर बहादुर सिंह की काव्य विशेषता अंग्रेजी काव्य शिल्प को आधुनिक रूप में प्रदान या देने का श्रेय केवल एजरा पाउंड को ही प्राप्त है

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शमशेर बहादुर सिंह का जन्म, shamsher bahadur singh ka janm

राजस्थान (shamsher bahadur singh history in hindi) के देहरादून में शमशेर बहादुर सिंह का जन्म ( shamsher bahadur singh ka janm ) वर्ष 13 जनवरी 1911 को हुआ था शमशेर बहादुर के पिता का नाम तारीफ से था और उनके माता का नाम परम देवी था शमशेर बहादुरसिंह (shamsher bahadur singh) के वाही जिनका नाम तेज बहादुर और वह उनसे 2 वर्ष छोटे थे शमशेर बहादुर सिंह के बचपन का नाम उनकी मां उन दोनों को प्यार से राम लक्ष्मण की जोड़ी कहकर पुकारा करती थी जब शमशेर 8 या 9 वर्ष के हो गए थे तब उनके मां की मृत्यु हो गई थी

उसके बाद भी दोनों भाइयों की जोड़ी शमशेर की मृत्यु तक बनी रही

शमशेर बहादुर सिंह का साहित्यिक परिचय, shamsher bahadur singh ka sahityik parichay

शमशेर बहादुर सिंह का साहित्यिक परिचय (shamsher bahadur singh ka sahityik parichay) प्रयोगवादी एवं नयी कविता के अग्रणी कवि शमशेर बहादुर सिंह का जन्म देहरादून में हुआ था । इन्होंने प्रारम्भिक शिक्षा देहरादून से तथा स्नातक परीक्षा इलाहाबाद से उत्तीर्ण की । फिर चित्रकला का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद स्नातकोत्तर परीक्षा उत्तीर्ण
की । (kavi shamsher bahadur singh ki kavita) ये रूपाभ ‘ , ‘ कहानी ‘ , ‘ नयी कहानी ‘ , ‘ कम्यून ‘ , ‘ माया ‘ , ‘ नया पथ ‘ आदि अनेक पत्रिकाओं के सम्पादन कार्य से जुड़े रहे । दिल्ली विश्वविद्यालय में रहकर ‘ उर्दू – हिन्दी शब्दकोश ‘ का सम्पादन किया , फिर उज्जैन के विक्रम विश्वविद्यालय में ‘ प्रेमचन्द सृजन – पीठ ‘ के अध्यक्ष रहे ।

अभावग्रस्त जीवन होने के बाद भी ये कमजोर नहीं पड़े , संघर्षशील बने रहे ।

मार्क्सवादी चेतना से प्रभावित (shamsher bahadur singh ki kavitayen in hindi) शमशेर बहादुरसिंह ‘ तार सप्तक ‘ के प्रकाशन से प्रयोगवादी कवि के रूप में सामने आये । ये ‘ नयी कहानी आन्दोलन ‘ से भी जुड़े रहे । इस तरह शमशेर बहादुर सिंह की कविता उषा एवं प्रयोगधर्मी कवि के साथ नयी शैली शिल्प के कवि रूप में कवि – कर्म में संलग्न रहे ।
शमशेर बहादुर की कविता बात बोलेगी इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं (shamsher bahadur singh ki rachnaye in hindi) ‘ कुछ कविताएँ ‘ , ‘ कुछ और कविताएँ ‘ , ‘ चुका भी नहीं हूँ मैं ‘ , ‘ इतने पास अपने ‘ , ‘ बात बोलेगी ‘ तथा ‘ काल तुझसे होड है मेरी आदि ।

इनका निधन सन् 1993 ई . में हुआ ।

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शमशेर बहादुर सिंह का विवाह, shamsher bahadur singh ka vivah

अतः शमशेर बहादुर सिंह का विवाह (shamsher bahadur singh ka vivah)18 वर्ष की अवस्था में वर्ष 1929 को धर्मवती के साथ हुआ था और उनके विवाह के पश्चात 6 महीने बाद ही वर्ष 1935 में उनके पत्नी की मृत्यु हो गई थी और मृत्यु का कारण टी बी बीमारी था उसके पश्चात शमशेर बहादुरसिंह (shamsher bahadur singh) को 24 वर्ष की उम्र में उनको कविता में विवाह का एहसास हमेशा बना रहा ताल द्वारा जिसे छीन लिया गया था वह अपनी पत्नी को अपने कविता का सजीव रखकर वह काल के साथ वोट करते थे शमशेर बहादुर अपने युवावस्था में ही उन्होंने वामपंथी विचारधारा तथा प्रगतिशील साहित्य सेवा प्रभावित हुए थे

उनका पूर्ण जीवन निम्न मध्यवर्गीय व्यक्ति का था

शमशेर बहादुर सिंह की शिक्षा, shamsher bahadur singh ki shiksha

अतः शमशेर बहादुर सिंह की शिक्षा (shamsher bahadur singh ki shiksha) देहरादून में हुई और उसके बाद उन्होंने हाई स्कूल इंटर की परीक्षा को गोंडा से दी और इलाहाबाद से उन्होंने बी ए फोनकी शमशेर बहादुर उच्च कारण वंश व एम ए के फाइनल की परीक्षा नहीं दे सके थे उनके बाद शमशेर ने वकील बंधुओं से 1935 – 36 में पेंटिंग की कला सीखी और उन्होंने उनके साथ कहानी तूफान नया साहित्य माया नया पंत मनोहर कहानियां आदि के रचनाओं के संपादक सहयोगी बने शमशेर बहादुर सिंह उर्दू हिंदी कोर्स प्रोजेक्ट के संचालक बने और उसके बाद वह विक्रम विश्वविद्यालय के प्रेमचंद सजन पीठ के अध्यक्ष बने थे और वह दूसरे तार सप्तक के कवि बने

शमशेर बहादुर सिंह की मृत्यु, shamsher bahadur singh ki martyu

12 मई 1993 को शमशेर बहादुर सिंह की मृत्यु (shamsher bahadur singh ki martyu) हो गई थी डॉक्टर ने उसकी पुष्टि की उनका नाम डॉ रंजना अरगड़े था और उनके अनुसार माना गया कि उन्हें हार्ड अटैक आया था और वह अस्पताल में 72 घंटे से भी कम रहे थे उनका वे समय कोई पीड़ा का समय तो नहीं था लेकिन उनको अंदाजा हो गया ताकि अब उनका जाने का समय आ गया है और उनसे कहा कि वह क्या सुनना पसंद करेंगे राजीव या कुछ और लेकिन उन्होंने सिर्फ इंकार कर दिया उसके बाद (baat bolegi shamsher bahadur singh) शमशेरबहादुर सिंह ने गायत्री मंत्र सुनने की इच्छा हुई जब वे उज्जैन में थे तब उनके पंक्तियों में छुट्टी संस्कृत की कड़ी जो उनके हाथ लग गई थी

और दूसरी और वह गायत्री मंत्र सुना रही थी और वह उसके साथ बोलते रहे

जब वह मंत्र बोलते बोलते बंद हो गई जान गई थी क्या अब वह नहीं रहे

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