रहीम दास का जीवन परिचय, rahim das ka jivan parichay

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रहीम दास का जीवन परिचय, rahim das ka jivan parichay

रहीम दास
रहीम दास

जब रहीम दास का जीवन परिचय (rahim das ka jivan parichay) रहीम दास का पूरा नाम अब्दुर्रहीम खानखाना था राजस्थान के लाहौर में रहीम दास का जन्म (rahim das ka janm) 17 सितंबर 1556 में हुआ था रहीमदास के पिता बैरम खान तथा उनकी माता का नाम सुल्तान बेगम था रहीमदास का जब जन्म हुआ था तब उनके पिता की उम्र 60 वर्ष थी रहीम के पिता बैरम खां की दो पत्नियां थी तथा दूसरी पत्नी का नाम सईदा था जो बाबर की बेटी गुलरुक बेगम की पुत्री थी रहीमदास के जीवन में एक महत्वपूर्ण घटना हुई थी

जो युद्ध के समय राणा प्रताप ने उनके घर में कुछ महिलाओं की सुरक्षा की और उनको घर छोड़ दिया

उस घटना के कारण लाइन ने मुसलमान और कर्म से भगवान कृष्ण के अनुयाई बन गए थे उसके बाद रहीम दास (rahim das) ने अपने जीवन में कृष्ण के प्रति अनेक कविताएं लिखी थी रहीम एक प्रमुख शिक्षक थे रहीमदास ने अपने जीवन में अरबीफारसी तुर्की आदि भाषाओं का ज्ञान अर्जित किया था उसके साथ रहीम दास (rahim das) ने अनेक रचनाएं की जिसमें संरचना गणित रचना कविता रचना का ज्ञान भी प्राप्त किया था उसके बाद उन्होंने शिक्षा प्राप्त कर रहीम ने बाबर की आत्मकथा तुर्की से फारसी में उसका उद्बोधन किया था रहीम की बढ़ती लोकप्रियता को देखकर अकबर ने उन्हे नवरत्नों में अपने दरबार में स्थान दिया नवरत्नों में एक ही रतन था

जो रहीम जिनकी कलम और तलवार दोनों ही विधाओं में समान अधिकार प्राप्त था

रहीम एक मुसलमान होते हुए भी अपने जीवन हिंदू धर्म को अपनाया रहते थे

1.बिहारी लाल का जीवन परिचय, bihari lal ka jivan parichay

2.दूसरा गोलमेज सम्मेलन, कम्युनल अवार्ड, पूना समझौता

रहीम दास का जन्म, rahim das ka janm

पाकिस्तान में लाहौर मैं रहीम दास का जन्म (rahim das ka janm)1556 ईस्वी में हुआ था रहीम दास (rahim das) का पूरा नाम अब्दुर्रहीम खानखाना था रहीम के पिता का नाम बैरम खान था

1.बाबू राजबहादुर का जीवन परिचय

रहीम दास की मृत्यु, rahim das ki martyu

जब अकबर की मृत्यु हो गई तो अकबर की जगह अकबर का पुत्र जहांगीर वहां का राजा बना परंतु जहांगीर के राजा बनने पर अबुल फजल और मानसी की तरह अब्दुल रहीम भी इसके खिलाफ थे इस कारण से जहांगीर ने अब्दुल रहीम के दोनों पुत्रों को मरवा दिया अब्दुल रहीम की मौत त्रिकूट में 1927 में हुई थी

उसकी मौत के बाद अनेक शव को दिल्ली में लाया गया

आज के दिन भी दिल्ली में वहां मकबरा स्थित है

1.कप्तान दुर्गा प्रसाद चौधरी का जीवन परिचय

रहीम दास का विवाह, rahim das ka vivah

सम्राट अकबर ने जब राम ने शिक्षा प्राप्त कर ली तब उनके पिता हुमायूं द्वारा उनको निर्वाह करते हुए उनका विवाह बैरम खा के विरोधी मिर्जा कोका की बहन महाबानो से करा दिया था रहीम दास के विवाह (rahim das ka vivah) के बाद उनके तीन पुत्र और दो पुत्री की प्राप्ति हुई रहीमदास (rahim das) के पहले बेटे का नाम इरिस और दूसरे का नाम दारा और तीसरे का नाम था रहीमदास के तीनों पुत्रों का नाम अकबर द्वारा रखे गए थे रहीम के विवाह के बाद बैरम खां और मिर्जा के बीच चल रही पुरानी दुश्मनी खत्म हो गई थी रहीम दास का दूसरा विवाह (rahim das ka dusra vivah) एक साजिश था जिसका सौदा हुआ और एक सौदा जाति की लड़की के साथ उनका विवाह हुआ

जिस और रहीम के दूसरी पत्नी के भी एक पुत्र की प्राप्ति हुई जिसका नाम रहमान दाद रखा था

उसके बाद रहीमदास का तीसरा विवाह भी हुआ उनका तीसरा विवाह एकादशी के साथ हुआ था

उसके तीसरी पत्नी के भी एक पुत्र की प्राप्ति हुई जिसका नाम अमरुल्ला था

1.चंदनमल बहड़ का जीवन परिचय

रहीम दास के साहित्यिक परिचय, rahim das ke sahityik parichay

रहीम दास के साहित्यिक परिचय (rahim das ke sahityik parichay) रचनाओं में उनके भक्ति एवं श्रृंगार का सुंदर वर्णन मिलता है रहीम दास (rahim das) ने अनेक प्रकार के ग्रंथों का भी अनुमोदन किया है रहीमदास के पिता बैरम खां अपने काल में एक अच्छे नीति के योद्धा माने जाते थे इस कारण से ही रहीम के मन में साहित्य के प्रति अधिक रुचि उत्पन्न हुई रहीम अपनी बाल्यावस्था में ही अनेक गुरुओं के संपर्क में रहने लगे और साहित्य का ज्ञान प्राप्त करने लगे जिसके कारण उनके ज्ञान में विस्तार हुआ उसके बाद उन्होंने अनेक रचनाएं लिखी

जिसमें महत्वपूर्ण तीन रचनाएं हैं वह ब्रिज, अवधि एवं खड़ी बोली जो कार्य रचना में रचित है

वह ब्रिज, अवधि एवं खड़ी बोली जो कार्य रचना में रचित है

1.प्रथम गोलमेज सम्मेलन

रहीम दास की रचनाएं, rahim das ki rachnaye

रहीम दास की रचनाएं (rahim das ki rachnaye) और दोहे अत्यधिक प्रसिद्ध है इन्होंने अपने जीवन में अनेक रचनाएं की जिसमें कविता, सवैया, सोरठा तथा बरवै, छंदों में भी उन्होंने सफलता पूर्ण काव्य रचना की प्रस्तुतीकरण दी है उन्होंने अनेक भाषाओं की शिक्षा प्राप्त की थी इस कारण से ही इनकी काफी रचनाओं में अलग-अलग भाषाओं का वर्णन होता है रहीम द्वारा अधिकांश रचनाओं में ब्रज भाषा का उपयोग किया जाता है और रहिम द्वारा अपनी रचनाओं में मुक्त शैली का प्रयोग किया है

और यह शैली अत्यंत सरल एवं बौधगम्य हैं

1.तृतीय गोलमेज सम्मेलन

2.गोलमेज सम्मेलन, गोलमेज सम्मेलन का आयोजन

3.बृजमोहन शर्मा का जीवन परिचय

4.ऋषिदत्त मेहता का जीवन परिचय

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