कृपाराम खिड़िया का जीवन परिचय, kriparam khidiya ka jivan parichay

0
133

कृपाराम खिड़िया का जीवन परिचय, kriparam khidiya ka jivan parichay

कृपाराम खिड़िया
कृपाराम खिड़िया

राजस्थान राजस्थानी भाषा के प्रसिद्ध कवि कृपाराम खिड़िया का जन्म पाली के समीप गांव मारवाड़ राज्य के खराड़ी में वर्ष 1743 में हुआ था कृपाराम खिड़िया ने अपने शिक्षा सीकर से प्राप्त की और सीकर के राजा देवी सिंह तथा लक्ष्मण सिंह के पास अपना जीवन यापन किया तथा वहां से कृपाराम खिड़िया ने शिक्षा प्राप्त कर अन्य बालकों को शिक्षा देना शुरू कर दिया और कृपाराम के पीर्य सेवक राजाराम और राजिया था कृपाराम का सेवक उसका कोई पुत्र नहीं था

उनका नाम अमर करने की दृष्टि से कृपाराम ने अनेक “सोरठों” की रचना की उस से उस को संबोधित करके उसका नाम अमर करना उनका उद्देश्य था इस कारण से कृपाराम ने राजस्थानी साहित्य के अनुसार “राजिया रा सोरठा” नामक रचना आज भी विख्यात है कृपाराम के “सोरठे” राजस्थान के लोक जीवन एवं उनकी नीतियां के रूप में प्रसिद्ध है कृपाराम नए राजस्थानी दो भाषाओं का प्रयोग किया जिसका नाम डिंगल और पिंगल है

1.रहीम दास का जीवन परिचय

2.सूरदास का जीवन परिचय

3.बिहारी लाल का जीवन परिचय

कृपाराम खिड़िया का जन्म, kriparam khidiya ka janm

कृपाराम खिड़िया का जन्म राजस्थान में मारवाड़ राज्य के खराड़ी गांव पाली के समीप वर्ष 1745 में उनका जन्म हुआ था कृपाराम एक राजस्थानी भाषा के प्रसिद्ध कवि के रूप में जाने जाते थे कृपाराम द्वारा दो राजस्थानी पुस्तकों की रचना की

जिनका नाम डिंगल और पिंगल है और एक “राजिया रा सोरठा” की रचना की थी

1.नानक भील का जीवन परिचय

2.स्वतंत्रता सेनानी के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य

कृपाराम खिड़िया का साहित्यिक परिचय, kriparam khidiya ka sahityik parichay

राजस्थान में कृपाराम खिड़िया राजस्थानी भाषा के प्रसिद्ध कवि माने जाते थे यह कृपाराम शाखा के चरण कवि थे कृपाराम खिड़िया भजन मारवाड़ राज्य के खराड़ी गांव में हुआ था कृपाराम का जीवन यापन सीकर के नरेश देवी सिंह तथा उनके पुत्र राजा राम लक्ष्मण सिंह के पास हुआ था कृपाराम ने सर्वप्रथम एक रचना 1864 के आस पास की थी कृपाराम ने अपने जीवन की पहली रचना “राजिया रा सोरठा” थी और एक नाटक की रचना की “चाल कनेसी” तथा एक अलंकार ग्रंथ का नाम गिनाया था

लेकिन “राजिया रा सोरठा” ही कृपाराम खिड़िया का एक रचना वर्तमान में उपलब्ध है

राजिया रा सोरठा का अभिवादन कृपाराम खिड़िया ने उनके प्रमुख सेवक के लिए उसकी रचना की थी उस सेवक का नाम राजाराम राजिया था कृपाराम ने इस छोटे की रचना उसके शिष्य का नाम अमर करने के लिए की थी इस रचना को संबोधनात्मक नीति काव्य माना जाता है यह काव्य डिगंल भाषा में उपयुक्त था उस सोरठो का लोक काव्य मैं उनकी रचना का भाव लोगों की मर्यादा आदर्शों और व्यवहार की शिक्षा को प्रदान करना है इस कारण से कृपाराम सस्ता सरलता सहजता के कारण राजस्थान के लोक समाज में बहुत ही प्रसिद्ध माने जाते हैं

1.प्रताप सिंह बारहठ का जीवन परिचय

2.बाबू राजबहादुर का जीवन परिचय

3.कप्तान दुर्गा प्रसाद चौधरी का जीवन परिचय

4.चंदनमल बहड़ का जीवन परिचय

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here