सेठ दामोदर दास राठी का जीवन परिचय, seth damodar das rathi ka jivan parichay – My blog

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सेठ दामोदर दास राठी
सेठ दामोदर दास राठी

पोकरण के मारवाड़ के गांव में सेट खेमराज जी राठी के घर में सेठ दामोदर दास राठी का जन्म 8 फरवरी सन 1884 ई में हुआ था अजय सेठ दामोदर दास राठी बचपन से ही होनहार एवं महाकाली थे सेठ दामोदर दास ने ब्यावर से मैट्रिक तथा मिशन हाई स्कूल ब्यावर से प्रभु दयाल जी अग्रवाल द्वारा अपना शिक्षा का अध्ययन किया अथर्व हित कार्यों में 15 16 वर्ष की आयु में ही अपना महत्वपूर्ण योगदान देने लगे थे अतः व्यवसाई कार्यों की देखरेख में रहते थे जो बहुत ही अनुभवी व्यवसाई थे

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सेठ दामोदर दास राठी स्वतंत्रता में योगदान, seth damodar das rathi ka swatantrata me yogdan

सेठ दामोदर दास राठी द्वारा भारतवर्ष में मारवाड़ी ओं की सर्वप्रथम मिल कृष्णा मिल सन 1993 ईस्वी में सर्वाधिक चली भारत के अनेक नगरों में उनकी अपनी दुकानें जिनिंग फैक्ट्रियां पेरसेज उपलब्ध थे अजय सेठ दामोदर दास ब्यावर में म्युनिसिपालिटी के सदस्य 19 वर्ष की आयु में ही वर्ष 1930 में बनाए गए जोकि सच्चे जनता के सेवक के रूप में उभरे थे वह बहुत ही जनता के लोकप्रिय क्रांतिकारी थे दामोदर दास महात्मा तिलक व अरविंद बॉस के थे अतः उन्होंने अपने तन और मन से क्रांतिकारियों की सेवा की तथा उनका देश के बड़े-बड़े नेताओं से संपर्क था अथर्व लोकमान्य तिलक तथा अरविंद को ब्यावर लाने में सफल नहीं हुए और महा पिता श्री दादा भाई नौरोजी ने राष्ट्र भारत भूषण मालवीय जी को बंगाल के बुड्ढे शेर बापू सुरेंद्रनाथ बनर्जी तथा अमृत बाजार पत्रिका को लाने में सफल हुए थे

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सेठ दामोदर दास राठी का उद्देश्य, seth damodar das rathi ka udheshya

सेठ दामोदर दास राठी ने महान राष्ट्र सेवा तथा परम जागरुक व्यक्ति को जिसने देश के हित के लिए क्या कुछ नहीं किया उनकी स्मृति को स्थाई बनाए रखने का परम आवश्यक है क्योंकि इस कारण आने वाली कई पीढ़ियों को प्रभावशाली साहित्य तथा देश भक्तों के जीवन की प्रेरणा मिलेगी इसी कारण ब्यावर में राठी साहब ने प्रतिमा लगवाई और उनके आदर्शों को जीवित रखने के लिए यह एक मात्र उपाय था जिसके कारण लोग उन्हें जीवन याद कर के क्रांतिकारी भावनाओं की प्रेरणा ले सके अबे राठी साहब के ही कारण राष्ट्रीय के देशभक्त ब्यावर में प्रवेश कर सके और भारत के अंदर सेठ दामोदर दास राठी के द्वारा ही ब्यावर की पहचान हो सकी तथा उनका ब्यावर में महत्वपूर्ण योगदान रहा

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