नागौर का किला, नागौर किले की स्थापना, nagaur ka kila, nagaur kile ki sthapana – My blog

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नागौर का किला
नागौर का किला

राजस्थान के स्थल दुर्गों में नागौर का किला (nagaur ka kila) प्राचीन दुर्ग उल्लेखनीय एवं महत्त्वपूर्ण है । यह नागौर का किला वीर अमरसिंह राठौड़ की शौर्य गाथाओं के कारण इतिहास में अपना एक विशिष्ट स्थान और महत्त्व रखता है । चारों ओर मरुस्थल और ऊबड़ – खाबड़ भूमि से घिरा नागौर का किला ‘ धान्वन दुर्ग ‘ की श्रेणी में आता है । नागौर राजस्थान का एक प्राचीन एवं ऐतिहासिक नगर है प्राचीन शिलालेखों और साहित्यिक ग्रन्थों में इसके नागदुर्ग , नागउर , नागपुर , नागाणा , अहिछत्रपर इत्यादि विविध नाम मिलते हैं । इनमें अहिछत्रपुर नगर का वर्णन महाभारत में आया है । प्राचीनकाल में नागौर और उसका निकटवर्ती प्रदेश जांगलक्षेत्र अथवा जागल जनपद के अंतर्गत आता ।

मूलत जांगल क्षेत्र जिसमें हर्ष , नागौर व सांभर सम्मिलित के अधीश्वर होने के कारण शाकम्भरी और अजमेर के चौहान नरेशों को प्रायः जांगलेश भी कहा जाता था तथा जागलप्रदेश के अधिपति होने के कारण ही आगे चलकर बीकानेर के राजा ‘ जांगलधर पातिसाह ‘ कहलाये । इतिहासकार डॉ . गौरीशंकर हीराचन्द ओझा की मान्यता है कि चौहानों का मूल राज्य जागलदेश में था और उसकी राजधानी अहिछत्रपुर नागौर थी । हालांकि इतिहासकार डॉ . दशरथ शर्मा ने अहिछत्रपुर का नागौर के साथ तादात्म्य संदिग्ध माना है । लेकिन विक्रम संवत् 1226 के बिजोलिया शिलालेख (bijoliya shilalekh) से पता चलता है कि चौहानों का पूर्वज सामन्त यहीं का स्वामी था । कालान्तर में यहाँ से जाकर चौहान ने साभर को अपनी राजधानी बनाया ।

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नागौर का किला की स्थापना, nagaur kile ki sthapana

प्राचीन काल में चौहाना के आधिपत्य के अन्तर्गत आने वाला समस्त प्रदेश सपादलक्ष ‘ कहलाता था । तत्पश्चात् जोधपुर रियासत के अन्तर्गत आने के बाद भी नागौर परगना ‘ श्वालक प्रदेश ‘ ही कहलाता रहा । नागौर दुर्ग के निर्माता (nagaur durg ke nirmata) के सम्बन्ध में प्रामाणिक जानकारी का अभाव है । ख्यातों के अनुसार चौहान राजा सोमेश्वर के सामन्त कैमास ने इस स्थान पर एक दिन एक भेड़ को भेड़िये से लड़ते हुए देखा । शकुन से इसे वीर भूमि जानकर उसने नागौर किले की स्थापना (nagaur kile ki sthapana) वैशाख सुदी 3 विक्रम संवत 1211 को नागौर किले की नींव (nagaur kile ki neev) रखी ।

वस्तुतः सिन्ध से दिल्ली को आने वाले मार्ग पर स्थित होने के कारण नागौर का किला (nagaur ka kila) सामरिक दृष्टि से बहुत महत्व रखता था ।

अपनी इस विशिष्ट स्थिति के कारण जहाँ एक ओर सीमा पार से आने वाले मुस्लिम आक्रान्ताओं की निगाहें बराबर इस दुर्ग पर लगी रहीं वहीं दूसरी ओर यह किला विभिन्न राजपूत राजवंशों के बीच भी कड़ी प्रतिस्पर्धा तथा युद्ध और संघर्षों का केन्द्र बना रहा । यह स्थान अजमेर की तरह मुस्लिम धर्मान्तरकारियों की प्रारम्भिक गतिविधियों और व्यापारिक काफिलों का भी आगमन स्थल रहा । इतिहासकार डॉ . दशरथ शर्मा ने नागौर के किले को चौहानों के अधीन सबसे सुदृढ़ दुर्गों कोटि में रखा । कि तराईन का दूसरा युद्ध (tarain ka dusra yudh) ( 1192 ई . ) में पृथ्वीराज चौहान की पराजय के फलस्वरूप नागौर का किला मुहम्मद गौरी ने हस्तगत कर लिया ।

गुलामवंशीय सुल्तान कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु (qutubuddin aibak death) के उपरान्त नागौर स्वतंत्र हो गया था जिस पर इल्तुतमिश ने फिर से अधिकार कर लिया ।

नागौर किले के युद्ध, nagaur kile ke yudh

वीरवर राव अमर सिंह राठौड़ के नाम से नागौर का किला बहुत ही प्रसिद्ध माना जाता है अर्थात नागौर किले के युद्ध (nagaur kile ke yudh) और उन युद्ध का गवाह है यह किला राजस्थान के अंदर नागौर का किला (nagaur ka kila) सबसे उच्च पाट भूमि पर बना हुआ है और इस किले की विशाल परिसर तथा ऊंची दीवारों के लिए प्रसिद्ध माना जाता है और उस किले के अंदर बाहरी पर्यटन आकर कहीं तुम्हारे मंदिरों खूबसूरत बगीचा को देखकर अपना मन मोहित करते हैंनागौर किले का निर्माण (nagaur kile ka nirman) नागवंशी ओं ने करवाया था और उसके बाद उस किले को मोहम्मद बहरीन द्वारा पुणे निर्माण किया गया

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नागौर किले का गौरवशाली इतिहास, nagaur kile ka gauravshali itihas

नागौर किले की सुंदरता (nagaur kile ki sundarta) उस किले के अंदर उपस्थित क्षत्रियों द्वारा है और उसका उदाहरण है नागौर के अंदर प्रवेश करते ही मिल जाता है नागौर किले के प्रवेश द्वार (nagaur kile ke pravesh dwar) तीन है उन तीन द्वारों को पार कर कर नागौर किले तक पहुंचा जाता है नागौर किले के प्रवेश द्वारों के नाम (nagaur kile ke pravesh dwaro ke name) देहरी द्वार, त्रिपोलिया द्वारा तथा नकाश द्वार है

अतर नागौर के किले के अंदर छोटे-छोटे सुंदर महल और अनेक आकर्षित करने वाली पुरानी छतरियां उपस्थित है

जो हमें राजस्थान के नागौर किले के गौरवशाली इतिहास (nagaur kile ka gauravshali itihas) मैं खींच लेती है

नागौर किले की बनावट, nagaur kile ki banawat

राजस्थान का प्रसिद्ध किला नागौर का किला (nagaur ka kila) जो जमीन के सपाट स्थल पर बना हुआ है हड़ताल उसके अंदर छोटे-छोटे महल तथा अनेक पुरानी छतरियां उपस्थित है जो मन को अपनी ओर आकर्षित करती है नागौर किले मैं महल के नाम (nagaur kile me mahal ke name) हाडी रानी, शीश महल और बादल य तीन महल उपस्थित है जोकि नागौर किले की बनावट (nagaur kile ki banawat) को आकर्षित और दुनिया भर में मशहूर करते है अर्थात नागौर किले के अंदर उस किले की रक्षा करते हुए जो योद्धा शहीद हुए उनके उपलब्ध में अनेक छतरियां का निर्माण करवाया गया था और वह आज भी उस किले में देखने को उपलब्ध है नागौर किले के मुख्य द्वार (nagaur kile ke mukhya dwar) 6 है

नागौर किले में प्रवेश करने का द्वार (nagaur kile me pravesh karne ka dwar) प्रथम लोहे द्वारा और लकड़ी के नुकीले किलो को मिलाकर बनाया गया है अर्थात जो किले की रक्षा करने के लिए दुश्मनों से उसे बचाने के लिए खास तौर पर उसका निर्माण करवाया गया था और नागौर किले के प्रवेश द्वार (nagaur kile ke pravesh dwar) खास तौर पर बिजली पोल, कचहरी पोल, सूरजपोल, धरती पर राजपूत आदि नागौर में न्यायपालिका के रूप में उसके इस्तेमाल करने के लिए बनवाया था

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