दूसरा गोलमेज सम्मेलन, कम्युनल अवार्ड, पूना समझौता, dusra golmej sammelan, communal award – My blog

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दूसरा गोलमेज सम्मेलन
दूसरा गोलमेज सम्मेलन

लंदन में दूसरा गोलमेज सम्मेलन 7 सितंबर 1931 (dusra golmej sammelan kab hua tha) को प्रारंभ हुआ उस सम्मेलन में भाग लेने के लिए अंबेडकर, गांधी जी, सरोजिनी नायडू एवं मदन मोहन मालवीय पहुंचे गांधी जी ने कहा कि कांग्रेसी एकमात्र ऐसी पार्टी है जो सांप्रदायिक नहीं है उन्होंने यह 30 नवंबर को कहा था वह पूर्ण जातियों का प्रतिनिधित्व करती हैं गांधी जी ने लंदन में दूसरा गोलमेज सम्मेलन (golmej sammelan 1930 in hindi) में पूर्ण भारत स्वतंत्रता की मांग की गांधी जी की इस मांग को ब्रिटिश सरकार द्वारा रद्द कर दी गई उस सम्मेलन में अन्य संप्रदायों के अपनी अपनी जातियों के लोगों ने अपने पटक पटक प्रतिनिधित्व की अलग-अलग मांग की और दूसरी और गांधीजी चाहते थे

भारत के अंदर संप्रदायिकता (golmej sammelan kab hua tha)को समाप्त कर दिया जाए और दूसरे दल उसे सांप्रदायिकता को बढ़ाने में लगे थे इस तरह गांधीजी वहां से निराश होकर वापस लौट आए गांधीजी ने भारत लौटकर आया

और 3 जनवरी 1932 को सविनय अवज्ञा आंदोलन (savinay avagya andolan kab shuru hua tha) का आरंभ कर दिया

उस कारण से 1 मई 1933 को गांधी जी और सरदार पटेल को पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया और कांग्रेसी गैर कानूनी संस्था घोषित कर दी

और कांग्रेश गैर कानूनी संस्था (golmej sammelan) घोषित कर दी

1.गोलमेज सम्मेलन, गोलमेज सम्मेलन का आयोजन, golmej sammelan, golmej sammelan ka aayojan

2.तृतीय गोलमेज सम्मेलन, tritiya golmej sammelan

दूसरा गोलमेज सम्मेलन कब हुआ, dusra golmej sammelan kab hua

दूसरा गोलमेज सम्मेलन लंदन (dusra golmej sammelan date) में 7 सितंबर 1931 को शुरू हुआ

अजय भारत के महा सेनानी गांधीजी, सरोजनी नायडू, अंबेडकर और मदन मोहन मालवीय आदि वहां सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे

1.बृजमोहन शर्मा का जीवन परिचय, brijmohan sharma ka jivan parichay

2.वैद्य मघाराम का जीवन परिचय, vaidya magharam ka jivan parichay

कम्युनल अवार्ड दूसरा गोलमेज सम्मेलन, communal award dusra golmej sammelan

संप्रदायिकता के समस्या को लेकर दूसरा गोलमेज सम्मेलन (dusra golmej sammelan) में निराकरण नहीं हो पाया था अतः उस कारण ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैम्से मैकडोनाल्ड ने 16 अगस्त 1932 को संप्रदायिक पंचघाट की घोषणा कर दी थी इस घोषणा के अनुसार कम्युनल अवार्ड तथा दूसरा गोलमेज सम्मेलन (communal award dusra golmej sammelan) विधान मंडलों के सदस्यों की संख्या का बंटवारा कर दिया गया

उसके तहत मुसलमानों, सीखो और भारतीयों ईसाइयों एग्लो इंडियन (savinay avagya andolan ka mahatva)हेतु अलग अलग चुनाव पद्धति की व्यवस्था कर दी गई

1.महिलाओं के लिए भी अलग स्थानों का निर्धारण कर दिया गया
2.अर्थात विश्वविद्यालय और शर्म व्यापार उद्योग जमींदारों के भी अलग चुनाव पद्धति की व्यवस्था कर दी गई
3.दलित वर्ग और हिंदुओं को हरिजनों से पृथक माना जाएगा 4.अतः सांप्रदायिक उन्माद फैलाने के लिए कम्युनल अवार्ड (savinay avagya andolan ke karan) भारत में लाना एक साजिश था अतः दलित वर्ग हिंदुओं और हरिजन को अलग करना सरासर गलत है इसके अनुसार यह फूट डालो राज्य करो की नीति का प्रकाशित हो गया था

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2.ऋषिदत्त मेहता का जीवन परिचय, rishidatta mehta ka jivan parichay

कम्युनल अवॉर्ड की घोषणा कब हुई, communal award ki ghoshna kab hui

कम्युनल अवार्ड सांप्रदायिक समस्या (communal award short notes)और दूसरा गोलमेज सम्मेलन (communal award ki ghoshna kab hui) के निराकरण नहीं होने के कारण 16 अगस्त 1932 को ब्रिटिश प्रधानमंत्री द्वारा कम्युनल अवॉर्ड (communal award in hindi)दिया गया था

1,भूपेंद्रनाथ त्रिवेदी का जीवन परिचय, bhupendranath trivedi ka jivan parichay

2.स्वामी केशवानंद का जीवन परिचय, swami keshwanand ka jivan parichay

पूना समझौता, puna samjhota

कम्युनल अवॉर्ड (communal award quora) से गांधी जी अत्यंत ही दुखी हुए गांधी जी ने लंदन के मुख्यमंत्री मैकडोनाल्ड को पत्र लिखकर चेतावनी दी थी कि वह अपना निर्णय 20 सितंबर 1932 को वापस ले ले अगर उन्होंने निर्णय नहीं बदला तो वह आमरण अनशन (amaran anshan) पर बैठेंगे लेकिन गांधी जी की बात को नहीं माना गया और आमरण अनशन 20 सितंबर 1932 (amaran anshan ) को प्रारंभ कर दिया

इसके बाद उन्होंने पुणे समझौता 26 सितंबर 1932 (puna samjhota kis varsh hua) को प्रारंभ किया और

इस समझौते के अनुसार

1.हरिजनों को हिंदुओं से अलग नहीं माना जाएगा कम्युनल अवार्ड (communal award) द्वारा हरिजनों को जितने स्थान दिए गए थे अब उनसे दुगने स्थान उनको दिए जाएंगे
2.सार्वजनिक सेवाओं तथा स्थानीय संस्थाओं में हरिजनों को उचित प्रतिनिधित्व स्थान दिया गया
3.शिक्षा हेतु आर्थिक सहायता हरिजनों को देने का गांधीजी ने वादा किया और गांधीजी के पुण्य समझौता (poona pact kya hai in hindi)के पश्चात उन्होंने आमरण अनशन को वापस ले लिया और और इस कारण हरिजनों को इस समझौते से अधिक लाभ प्राप्त हुआ और कांग्रेस द्वारा सविनय अवज्ञा आंदोलन 1 मई 1933 को समाप्त (savinay avagya andolan) कर दिया गया था

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दूसरा गोलमेज सम्मेलन का महत्व, dusra golmej sammelan ka mahtwa

दूसरा गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस से गांधी जी ने अपना नेतृत्व किया गांधी जी ने कहा कि उनकी पार्टी पूरे भारत का प्रतिनिधित्व कर रही है और उस दावे को तीन पार्टियों ने चुनौती दी उसमें मुस्लिम लीन का कहना था कि वह अल्पसंख्यकों को मुस्लिम के हित में काम करती हो और राजे रजवाड़ों का दावा था कि वह कांग्रेस के निर्णय कबू पार्क पर कोई अधिकार ना रहे तीसरी चुनौती उन्होंने दिखी रे वकील और विचार भी अंबेडकर की तरफ से तेज तरार थी उन्होंने वहां पर का की कांग्रेस पार्टी नीचे जातियों का प्रतिनिधित्व नहीं करती है और लंदन में हुआ दूसरा गोलमेज सम्मेलन (poona pact) का कोई भी निर्णय नहीं निकला इस कारण गांधी जी वहां से वापस खाली हाथ लौट कर आए भारत आने के बाद उन्होंने सविनय अवज्ञा आंदोलन (savinay avagya andolan in hindi) को प्रारंभ कर दिया

नए लोड ब्लीडिंग को गांधी जी से कोई भी हमदर्दी नहीं थी

और अपने बहन को निजी खत विलिंगडन ने लिखा था कि

यह दुनिया वाकई बहुत खूबसूरत होती अगर गांधी ने होता। या कोई भी कदम उठाता है उसे लोग ईश्वर की प्रेरणा का परिणाम मानते हैं। लेकिन उनके पीछे एक राजनीतिक चाल होती है अमेरिका प्रेस उसको गजब का आदमी बताती है सच तो यह है कि हमने हाइट रहस्यवादी ए व्यापारिक और आदि विश्वासी जनता के बीच रह रहे हैं जो गांधी जी को भगवान मानकर बैठे हैं

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