तृतीय गोलमेज सम्मेलन, tritiya golmej sammelan, tino golmej sammelan – My blog

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तृतीय गोलमेज सम्मेलन
तृतीय गोलमेज सम्मेलन

पूना समझौता होने के बाद लंदन में तृतीय गोलमेज सम्मेलन 17 नवंबर 1932 से 24 सितंबर 1932 (tritiya golmej sammelan ka mahatva) के बीच किया गया था इस सम्मेलन (sammelan) से जिसे स्वस्थ व वातावरण सदा सदा बना की आवश्यकता थी उसकी इस सम्मेलन (sammelan)में है अभावना ही रही लेकिन तृतीय गोलमेज सम्मेलन (tritiya golmej sammelan)में भी कांग्रेस ने भाग नहीं लिया था

ब्रिटिश सरकार द्वारा तीनो गोलमेज सम्मेलनों (tino golmej sammelan) की सिफारिशों को लेकर एक श्वेत पत्र को जारी किया और उन प्रस्तावों पर विचार-विमर्श हेतु लॉर्ड नैनो लिखो की अध्यक्षता में संसदीय समिति को नियुक्त किया था

उस संशोधन में लिनोलिथो द्वारा सिफारिश को कुछ परिवर्तन कर भारत सरकार अधिनियम 1935 को पारित (bharat sarkar adhiniyam) कर दिया था

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तृतीय गोलमेज सम्मेलन कब शुरू हुआ, tritiya golmej sammelan kab shuru hua

तृतीय गोलमेज सम्मेलन (tritiya golmej sammelan kab shuru hua) लंदन में 17 नवंबर 1932 से 24 सितंबर 1932 के बीच में चला था उस सम्मेलन (ammelan) के लिए आवश्यक वाटर की आवश्यकता थी लेकिन वह प्राप्त नहीं हो पाया उस का अभाव ही रहा था

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तृतीय गोलमेज सम्मेलन का महत्व, tritiya golmej sammelan ka mahatva

तृतीय गोलमेज सम्मेलन (tino golmej sammelan me kisne bhag liya) से संवैधानिक प्रगति के कुछ सिद्धांत भारतीयों के लोगों को भी सहमत हुए लेकिन ब्रिटिश सरकार द्वारा जो श्वेत पत्र जारी किए गए थे उन्हें ब्रिटिश सरकार में संयुक्त परिवार समितियों के सम्मुख रखा गया था वहीं श्वेत पत्र आगे चलकर 1933 में गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट भारतीय शासन (Searches related to tritiya golmej sammelan) विधान का आधार बन चुका था तीसरा गोलमेज सम्मेलन (tino golmej sammelan) में एक कॉलेज छात्र चौधरी रहमत अली ने / भारत के मुस्लिम भाग का नाम पाकिस्तान और उसका पवित्र भूमि अर्थ (pavitra bhumi ka arth) रख दिया तथा उसका नाम उसने कश्मीर से सिद्ध से बलूचिस्तान ‘तान’ लेकर य शब्द बनाया लेकिन उस सम्मेलन (sammelan)में जिन्ना ने हिस्सा नहीं लिया

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